इन्द्र धनुष के रंग सुनहरे
नीली गगन की शोभा हैं
सप्त वर्ण की रेखा से - इसे
इश्वर ने ही सजाया हैं
दूर से आती ठंडी पवन
ले आती चंदन की सुगंध
नन्हे - मुन्हे बच्चे हम भी
बन जाये दुनिया के सुगंध
जीवन के हर मोड़ में हम
याद करेंगे ईशू को
सुख और दुःख में भी मिलकर
गाये इश्वर प्यारा हैं
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